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मेरा भारत महान! --->कविता

Posted On: 21 Aug, 2012 Others में

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मेरा भारत महान!

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सालों पहले देखा
सपना एक
भारत महान का।
आलम था बस
इन्सानियत, मानवता का,
सपने के बाहर
मंजर कुछ अलग था,
बिखरा पड़ा था…
टूटा पड़ा था…
सपना…
भारत महान का।
चल रही थी आँधी एक
आतंक भरी,
हर नदी दिखती थी
खून से भीगी-भरी,
न था पीने को पानी
हर तरफ था बस
खून ही खून।
लाशों के ढ़ेर पर
पड़ा लहुलुहान…
कब सँभलेगा
मेरा भारत महान!

—————————

@ डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

बिलकुल आशा है जी..आभार आपका..

shalinikaushik के द्वारा
22/08/2012

आशा रखिये वह सुबह कभी तो आएगी .नारी के तुल्य केवल नारी


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