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तुम्हारा एहसास –> कविता

Posted On 1 Sep, 2012 में

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कविता –> तुम्हारा एहसास

———————————-

नहीं सोचा था कि तुम
इस तरह रूठ जाओगे,
हम पुकारेंगे तुम्हें
और तुम
लौट कर न आओगे।
जाना ही था इस तरह
मुंह मोड़ कर तो,
दिल इस तरह लगाना न था।
बेगाना होना था हम सभी से तो,
हमको अपना बनाना न था।
एक उम्र भी कम रहती वैसे तो
तुम्हारे साथ बिताने को
पर……
जो गुजरे दो पल
काफी हैं वही अब
उम्र भर रुलाने को।
छवि जो बसी है दिल में
वही आंखों में सज गई है
पर………
नसीब में नहीं है
उसे भी निहार पाना
क्योंकि आंख भी
आंसुओं से धुंधला गई है।
मन नहीं मानता है अभी भी
तुम्हारा न होना,
हर आहट,
हर दस्तक पर अहसास
कि हो तुम्हारा आना
पर……..
तुम तो चमक रहे
दूर आसमान पर बन कर सितारे,
यहाँ बेचैन हैं तुम्हें देखने को
वीरान गुलशन के नजारे।
फ़िर भी हम रखेंगे
तुम्हारा वजूद कायम,
उन सपनों के सहारे
जो तुमने देखे,
उन खिलौनों के सहारे
जो तुमने खेले।
तुम्हारी साँसों से रची-बसी
आँगन की हवा के सहारे।
तुम्हारी किलकारी,
तुम्हारी हँसी से गूंजती
फिजा के सहारे।
लड़खडाने पर तुम्हें संभालते
अपने हाथों के सहारे।
थकन भरे क्षणों में जो गुजारे
उस माँ के आँचल के सहारे…
कौन कहता है
कि तुम नहीं हो,
हर अहसास,
हर लम्हा,
हर याद,
हर तस्वीर बताती है
कि तुम हो,
यहीं हो,
कहीं बहुत नजदीक,
इस दिल के आसपास ही हो।

@डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
03/09/2012

तुम्हारी किलकारी, तुम्हारी हँसी से गूंजती फिजा के सहारे। लड़खडाने पर तुम्हें संभालते अपने हाथों के सहारे। थकन भरे क्षणों में जो गुजारे उस माँ के आँचल के सहारे… कौन कहता है कि तुम नहीं हो, हर अहसास, हर लम्हा, हर याद, हर तस्वीर बताती है कि तुम हो, आज एकदम से राजनीती से हटकर साहित्य की तरफ रुख कर लिया सेंगर साब आपने ! और वो भी भावों से भरी एक उत्तम रचना के साथ ! अति सुंदर भाव आदरणीय सेंगर जी ,हार्दिक बधाई

    डॉ कुमारेन्द्र सिंह सेंगर के द्वारा
    07/09/2012

    इस तरफ तो बहुत छोटे से कलम चला रहे हैं..इसी कारण से ये साहित्यिक ब्लॉग अलग बना लिया. आप लोग हौसला बढ़ाये रहें हम कलम चलते रहेंगे. आभार आपका

rekhafbd के द्वारा
02/09/2012

कौन कहता है कि तुम नहीं हो, हर अहसास, हर लम्हा, हर याद, हर तस्वीर बताती है कि तुम हो, यहीं हो, कहीं बहुत नजदीक, इस दिल के आसपास ही हो।,अति सुंदर भाव आदरणीय सेंगर जी ,हार्दिक बधाई

    डॉ कुमारेन्द्र सिंह सेंगर के द्वारा
    07/09/2012

    आभार आपका, कविता पसंद आने के लिए

Chandan rai के द्वारा
02/09/2012

कुमार जी , नहीं सोचा था कि तुम इस तरह रूठ जाओगे, हम पुकारेंगे तुम्हें और तुम लौट कर न आओगे। जाना ही था इस तरह मुंह मोड़ कर तो, दिल इस तरह लगाना न था। एक बेहतरीन कविता के लिए हार्दिक अभिनन्दन स्वीकारे

    डॉ कुमारेन्द्र सिंह सेंगर के द्वारा
    07/09/2012

    आभार आपका, आप लोगों की उत्साहजनक प्रतिक्रिया ही लिखने को प्रेरित करती है

Ravinder kumar के द्वारा
01/09/2012

सेंगर जी, नमस्कार. एक उम्र भी कम रहती वैसे तो तुम्हारे साथ बिताने को पर…… जो गुजरे दो पल काफी हैं वही अब उम्र भर रुलाने को। मन के तारों को झंकृत करती खूबसूरत रचना के लिए आप को बधाई. लिखते रहिये, हमारी शुभकामनाएं. नमस्ते जी.

    डॉ कुमारेन्द्र सिंह सेंगर के द्वारा
    07/09/2012

    आपको कविता पसंद आने का आभार. आप पढ़ते रहिये, हौसला बढ़ाते रहिये…हम लगातार लिखते रहेंगे

seemakanwal के द्वारा
01/09/2012

ह्रदय स्पर्शी कविता .अति भावुक .

    डॉ कुमारेन्द्र सिंह सेंगर के द्वारा
    07/09/2012

    आभार आपका, अच्छा लगा जानकर कि कविता आपको पसंद आई


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