मन-स्पंदन

मन की उड़ान को शब्द देने का प्रयास

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तुम महसूस तो करो

Posted On 17 Sep, 2012 Others में

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तुम महसूस तो करो —>कविता

सोचो न कभी खुद को तन्हा यहाँ
हम सब हैं साथ तुम्हारे सदा,
तुम्हारे साये की तरह,
तुम महसूस तो करो।

महसूस करो हमारा होना तुम,
अपने खून की रवानी में,
दिल की धड़कन में,
अपनी हर साँस में।
हर धड़कन में है संदेश
हमारे प्यार का।
हर साँस में है महक
स्नेह, दुलार की,
हम सभी के विश्वास की,
तुम महसूस तो करो।

गुजारे जो दोस्त, यारों के संग,
बचपन के वो सुहाने दिन,
गुजर गये वो
हवा के झोंकों की तरह।
लड़खड़ा कर गिरना,
सँभलना फिर
वो माता-पिता की बाँहों में।
वो अपनों से झगड़ने का
मीठा एहसास,
अब भी है
दिल के किसी कोने में,
बन करके याद तुम्हारे आसपास,
तुम महसूस तो करो।

@ डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
18/09/2012

बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना कुमारेन्द्र जी.

Santosh Kumar के द्वारा
17/09/2012

श्रद्धेय ,..सादर प्रणाम गहरे अपनत्व का बोध कराती रचना ,..हार्दिक अभिनन्दन


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